: मूचनार लघु सिंचाई परियोजना में लाखों का भ्रटाचार उजागर, अफसर और ठेकेदार की मिली भगत से लघु सिंचाई परियोजना दम तोड़ गई वन एवम जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप से न्याय की गुहार ग्राम वासी एवम पंचायत के लोग मंत्री जी से जल्द मुलाकात करेंगे
Ten Singh Thakur
Sat, Jan 18, 2025
तेन सिंह ठाकुर
गीदम ब्लॉक के मुचनार पंचायत में सिंचाई परियोजना में भष्टाचार का मामला उजागर हुआ है


लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी काम अपूर्ण है।
सिंचाई सुविधा के अभाव में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि खाली है। वही किसानों को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।
दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से तकरीबन 35 किलोमीटर दूर मुचनार पंचायत में इंद्रावती नदी से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने लगभग 4 साल पूर्व एक लघु सिंचाई परियोजना शुरू की गई। इसके लिए कांग्रेस के भूपेश बघेल सरकार ने सिंचाई विभाग को एक करोड़ रूपये आबंटित किया था। स्टीमेट के मुताबिक इंद्रावती नदी के तट पर पंप हाउस का निर्माण , भूमिगत पाईप लाईन, सीमेंट पोल में तार जाली से फेसिंग कर सिंचित एरिया को सुरक्षित करने का प्रावधान था। इसमें से एक भी काम ईमानदारी से नहीं हुआ। फेंसिंग में इस्तेमाल सीमेंट के पोल मानक के अनुसार नहीं है। वहीं तार जाली मजबूत नहीं है। सिंचित एरिया का फेंसिंग आज भी अधूरा है। देखरेख के अभाव में कहीं- कहीं पर तार के नेट और खंबे चोरी हो चुके हैं। पंप हाउस भी आवश्यकता से कम बनाए गए हैं। कोड़नार नाव घाट के समीप इंद्रावती नदी तट पर पंप हाउस का निर्माण किया गया है। भूमिगत पाईप लाईन में बिछाई गई पाईप की गुणवत्ता ठीक नहीं है। यही कारण है कि जब विद्युत चलित 15 हार्स पावर पंप स्थापित कर परीक्षण किया गया तो वह असफल रहा। पानी के प्रेशर से पाईप जगह- जगह फट गया और आज तक इसे दुरूस्त नहीं किया जा सका है। पाईप लाईन की टेस्टिंग फेल होने के बाद आज 5 साल होने जा रहा है सिंचाई विभाग के अफसर इस अधूरा काम को पूरा करने कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। सिंचाई विभाग की ओर से राजनांदगांव के एक ठेकेदार को मुचनार में सिंचाई परियोजना का ठेका दिया गया था। उक्त ठेकेदार काम को छोड़ रफूचक्कर हो गया है। सिंचाई विभाग के अफसरों और ठेकेदार की लापरवाही एंव धन कमाने की लालसा में शासन का लाखों रुपए ब्यर्थ चला गया। वहीं इलाके के किसानों को सिंचाई सुविधा से भी वंचित होना पड़ा। इंद्रावती सामुहिक उदवहन सिंचाई यदि सफल हो जाती तो आज लगभग 250 हेक्टेयर भूमि में हरियाली नजर आती। यही नहीं मुचनार के सैकड़ों किसानों की रोजीरोटी का पक्का इंतजाम हो जाता। मुचनार निवासी थलेश ठाकुर ने बताया कि सिंचाई सुविधा के अभाव में किसान केवल खरीफ की फसल का ही उत्पादन करते हैं। रबी फसल गेहूं, चना, सरसों, मूंग, मटर आदि की खेती नहीं कर पा रहे हैं। सिंचाई परियोजना पूरी क्यों नहीं हुई, इसकी जाँच जरूरी है।
मुचनार के सरपंच रति भास्कर ने कहा कि पंचायत का अधिकार सिंचाई परियोजना के लिए प्रस्ताव पारित करने तक सीमित था। 1 करोड़ की लागत वाले इस परियोजना को चार साल बाद भी पूरा नहीं किया गया। इलाके के किसानों के साथ अन्याय है।
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तेन सिंह ठाकुर
6264046084
गीदम ब्लॉक के मुचनार पंचायत में सिंचाई परियोजना में भष्टाचार का मामला उजागर हुआ है


लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी काम अपूर्ण है।
सिंचाई सुविधा के अभाव में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि खाली है। वही किसानों को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है।
दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से तकरीबन 35 किलोमीटर दूर मुचनार पंचायत में इंद्रावती नदी से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने लगभग 4 साल पूर्व एक लघु सिंचाई परियोजना शुरू की गई। इसके लिए कांग्रेस के भूपेश बघेल सरकार ने सिंचाई विभाग को एक करोड़ रूपये आबंटित किया था। स्टीमेट के मुताबिक इंद्रावती नदी के तट पर पंप हाउस का निर्माण , भूमिगत पाईप लाईन, सीमेंट पोल में तार जाली से फेसिंग कर सिंचित एरिया को सुरक्षित करने का प्रावधान था। इसमें से एक भी काम ईमानदारी से नहीं हुआ। फेंसिंग में इस्तेमाल सीमेंट के पोल मानक के अनुसार नहीं है। वहीं तार जाली मजबूत नहीं है। सिंचित एरिया का फेंसिंग आज भी अधूरा है। देखरेख के अभाव में कहीं- कहीं पर तार के नेट और खंबे चोरी हो चुके हैं। पंप हाउस भी आवश्यकता से कम बनाए गए हैं। कोड़नार नाव घाट के समीप इंद्रावती नदी तट पर पंप हाउस का निर्माण किया गया है। भूमिगत पाईप लाईन में बिछाई गई पाईप की गुणवत्ता ठीक नहीं है। यही कारण है कि जब विद्युत चलित 15 हार्स पावर पंप स्थापित कर परीक्षण किया गया तो वह असफल रहा। पानी के प्रेशर से पाईप जगह- जगह फट गया और आज तक इसे दुरूस्त नहीं किया जा सका है। पाईप लाईन की टेस्टिंग फेल होने के बाद आज 5 साल होने जा रहा है सिंचाई विभाग के अफसर इस अधूरा काम को पूरा करने कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। सिंचाई विभाग की ओर से राजनांदगांव के एक ठेकेदार को मुचनार में सिंचाई परियोजना का ठेका दिया गया था। उक्त ठेकेदार काम को छोड़ रफूचक्कर हो गया है। सिंचाई विभाग के अफसरों और ठेकेदार की लापरवाही एंव धन कमाने की लालसा में शासन का लाखों रुपए ब्यर्थ चला गया। वहीं इलाके के किसानों को सिंचाई सुविधा से भी वंचित होना पड़ा। इंद्रावती सामुहिक उदवहन सिंचाई यदि सफल हो जाती तो आज लगभग 250 हेक्टेयर भूमि में हरियाली नजर आती। यही नहीं मुचनार के सैकड़ों किसानों की रोजीरोटी का पक्का इंतजाम हो जाता। मुचनार निवासी थलेश ठाकुर ने बताया कि सिंचाई सुविधा के अभाव में किसान केवल खरीफ की फसल का ही उत्पादन करते हैं। रबी फसल गेहूं, चना, सरसों, मूंग, मटर आदि की खेती नहीं कर पा रहे हैं। सिंचाई परियोजना पूरी क्यों नहीं हुई, इसकी जाँच जरूरी है।
मुचनार के सरपंच रति भास्कर ने कहा कि पंचायत का अधिकार सिंचाई परियोजना के लिए प्रस्ताव पारित करने तक सीमित था। 1 करोड़ की लागत वाले इस परियोजना को चार साल बाद भी पूरा नहीं किया गया। इलाके के किसानों के साथ अन्याय है।
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