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सह संपादक अर्जुन देवांगन : रावघाट परियोजना की समस्याओं को लेकर श्रमिक विकास समिति ने कमिश्नर और दो कलेक्टरों को सौंपा ज्ञापन

रावघाट परियोजना की समस्याओं को लेकर श्रमिक विकास समिति ने कमिश्नर और दो कलेक्टरों को सौंपा ज्ञापन

परिवहन भाड़ा ₹707 से बढ़ाकर ₹910 प्रति टन करने, 100% स्थानीय भर्ती, जर्जर सड़कों की मरम्मत और किसानों को मुआवजा देने की मांग

नारायणपुर, 14 अक्टूबर 2026। रावघाट परियोजना क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों, वाहन मालिकों और श्रमिकों की विभिन्न समस्याओं को लेकर बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति ने बुधवार को बस्तर संभाग के कमिश्नर तथा नारायणपुर और उत्तर बस्तर कांकेर के कलेक्टरों को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। समिति ने क्षेत्र की समस्याओं का शीघ्र निराकरण करते हुए प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने की मांग की है।

समिति ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि रावघाट परियोजना क्षेत्र में लौह अयस्क परिवहन, स्थानीय युवाओं को रोजगार, सड़कों की बदहाली, वाहन चालकों की कार्य परिस्थितियों, किसानों की फसल क्षति और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। इन समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होने से क्षेत्रवासियों में असंतोष बढ़ने की आशंका जताई गई है।

परिवहन भाड़ा बढ़ाने और सड़कों की मरम्मत की मांग

समिति ने वर्तमान महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए लौह अयस्क परिवहन का भाड़ा ₹707 प्रति टन से बढ़ाकर ₹910 प्रति टन करने की मांग की है। समिति के अनुसार, नारायणपुर-अंतागढ़ मार्ग की जर्जर स्थिति के कारण परिवहन में लगे वाहनों के गियर बॉक्स और अन्य महंगे पुर्जे बार-बार खराब हो रहे हैं। इससे टिप्पर मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कई वाहन मालिक कर्ज के बोझ से जूझ रहे हैं।

खदानों में 100 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग

समिति ने कहा कि रावघाट खदान परियोजना से स्थानीय ग्रामीणों की कृषि भूमि और आजीविका प्रभावित हुई है। इसके बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने की शिकायत है। ज्ञापन में गैर-तकनीकी और अर्ध-तकनीकी पदों पर 100 प्रतिशत स्थानीय युवाओं की अनिवार्य एवं पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

24 घंटे ड्यूटी और नो-एंट्री से चालकों की परेशानी

समिति ने वाहन चालकों की कार्य परिस्थितियों पर भी चिंता जताई। ज्ञापन के मुताबिक, दिन में नो-एंट्री लागू होने के कारण चालकों को रात में वाहन चलाना पड़ता है। सुबह लौटने के बाद भी उन्हें लोडिंग पॉइंट पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। इस तरह पर्याप्त आराम नहीं मिलने से चालकों की सेहत और सड़क सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। समिति ने चालकों को उचित विश्राम देने और परिवहन व्यवस्था में सुधार करने की मांग की है।

फाइनेंस एजेंटों की कथित प्रताड़ना पर कार्रवाई की मांग

समिति ने आर्थिक मंदी और वाहन ऋण की किश्तें चुकाने में आ रही कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि फाइनेंस कंपनियों के कुछ एजेंट वाहन मालिकों के घर पहुंचकर उन्हें धमकाते और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। समिति ने संबंधित मामलों की जांच कराकर प्रभावित परिवारों को राहत देने तथा नियमों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

‘लालपानी’ से फसल खराब होने पर मुआवजे की मांग

खदानों से निकलने वाले दूषित लाल पानी के कारण कृषि भूमि और फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायत भी ज्ञापन में शामिल है। समिति के अनुसार, इससे किसानों की खड़ी फसलें प्रभावित हो रही हैं और भूमि की उर्वरता पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। प्रभावित किसानों की भूमि और फसलों का संयुक्त सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने तथा उचित मुआवजा देने की मांग की गई है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर उठाए सवाल

समिति ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में बताया गया कि स्कूल अंतागढ़ में होने के कारण बच्चों को प्रतिदिन लगभग 100 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। समिति ने स्कूल को नारायणपुर या भैंसगांव के आसपास स्थानांतरित करने की मांग की है।

इसके अलावा, प्रभावित गांवों के स्कूलों में डीएमएफटी और सीएसआर मद से आरओ वाटर, इनवर्टर, बेंच और टेबल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। नर्सिंग और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए सहायता देने, अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाकर प्राथमिक स्तर पर ₹20,000 और मिडिल स्तर पर ₹25,000 करने तथा बंद पड़ी सोलर लाइटों और उप स्वास्थ्य केंद्रों का जीर्णोद्धार कराने की मांग भी रखी गई है।

‘विकास का विरोध नहीं, स्थानीय अधिकारों की रक्षा हमारा उद्देश्य’

बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन विकास के विरोध में नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के अस्तित्व, रोजगार और अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि खदान परियोजना से प्रभावित होने वाले स्थानीय युवाओं, किसानों और ग्रामीणों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। प्रशासन को इन संवेदनशील मुद्दों पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

समिति ने उम्मीद जताई कि बस्तर संभाग के कमिश्नर और नारायणपुर एवं उत्तर बस्तर कांकेर के कलेक्टर ज्ञापन में उठाई गई समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देंगे, ताकि क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों, वाहन स्वामियों और श्रमिकों को जल्द राहत मिल सके।

बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति, जिला नारायणपुर, छत्तीसगढ़ ने बताया कि यह ज्ञापन क्षेत्रवासियों, किसानों, वाहन स्वामियों और श्रमिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सौंपा गया है।

सह संपादक

अर्जुन देवांगन

9424287527

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