Fri 31 Jul 2026

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तेन सिंह ठाकुर : प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने “क्रिटिकलिटी” प्राप्त कर । भारतीय वैज्ञानिकों को मिली असाधारण सफलता

भारत ने कुछ असाधारण हासिल कर लिया है..... जिसके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं.... इस उपलब्धि की अहमियत का पता नहीं.

कलपक्कम न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने “क्रिटिकलिटी” प्राप्त कर ली है।

कल रात 8:25 बजे भारत ने वो कर दिखाया, जिसकी दुनिया सालों से इंतजार कर रही थी। रिएक्टर अब खुद-ब-खुद न्यूट्रॉन पैदा करके परमाणु विखंडन की आग को जलाए रख सकता है। बिना किसी बाहरी मदद के।ये कोई साधारण घटना नहीं... ये भारत के तीन चरणीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण आधिकारिक तौर पर सक्रिय होने का ऐलान है।

PM मोदी ने खुद इसे “defining step” बताया और कहा — ये गर्व का पल है। अब समझिए इसकी भयंकर ताकत: 1 किलो कोयला जलाओ → सिर्फ 8 kWh बिजली

1 किलो यूरेनियम-235 → 2 करोड़ 40 लाख kWh बिजली

लेकिन 1 किलो थोरियम... वो देगा जितनी बिजली 200 टन यूरेनियम या 3500 टन कोयला से मिलती है!

भारत के पास दुनिया का 25% थोरियम भंडार है — यानी 10 लाख टन से ज्यादा!

अगर हम इसे पूरा इस्तेमाल कर लें, तो 3,58,000 गीगावॉट ईयर बिजली पैदा कर सकते हैं।

तुलना करो:

भारत अभी पूरे साल में जितनी बिजली बनाता है — वो सिर्फ 170-190 गीगावॉट ईयर है।

यानी थोरियम पर चलते हुए हम कई सौ सालों तक स्वच्छ, सस्ती और आत्मनिर्भर ऊर्जा में तैर सकते हैं!

ये कोई साधारण रिएक्टर नहीं है।

ये भारतीय डिजाइन, भारतीय वैज्ञानिकों और BHAVINI + IGCAR की दशकों की रात-दिन की मेहनत का नतीजा है।

डॉ. होमी भाभा ने 1950-60 के दशक में जो सपना देखा था —

थोरियम से ऊर्जा का अमृत — वो आज हकीकत बन रहा है।

जब पूरी दुनिया कोयला, गैस और यूरेनियम के लिए लड़ रही है, तब भारत चुपचाप अपना भविष्य गढ़ रहा है।

इस उपलब्धि के पीछे हमारे देश के वैज्ञानिक, इंजीनियर और टेक्नीशियन — जिन्होंने सालों तक बिना सुर्खियों के, बिना थके, असंभव को संभव बनाया।

भारत अब सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भर नहीं... ऊर्जा का साम्राज्य बनाने की राह पर है!

ये पल गर्व का है।ये पल इतिहास रचने का है।

सभी उन वैज्ञानिकों को मेहनत का नतीजा है, जिन्होंने सिर्फ रिएक्टर नहीं... भारत के आने वाले सैकड़ों सालों को रोशन कर दिया है।

प्रधान संपादक

तेन सिंह ठाकुर

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