अर्जुन देवांगन क़ि रिपोर्ट : कोयलीबेड़ा आंदोलन पांचवें दिन भी जारी, सुनवाई नहीं होने से बढ़ा आक्रोश, अंतागढ़ में चक्काजाम की चेतावनी
Ten Singh Thakur
Mon, Jun 1, 2026
कोयलीबेड़ा आंदोलन पांचवें दिन भी जारी, सुनवाई नहीं होने से बढ़ा आक्रोश, अंतागढ़ में चक्काजाम की चेतावनी
कोयलीबेड़ा। क्षेत्र की दस सूत्रीय मांगों को लेकर सर्व आदिवासी समाज एवं गोंडवाना समन्वय समिति के बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम आंदोलन सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। लगातार पांच दिनों से आंदोलन जारी रहने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस पहल या उच्चस्तरीय निर्णय नहीं होने से आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। धरना स्थल पर जुटे ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों द्वारा जल्द हस्तक्षेप नहीं किया गया तो आंदोलन का दायरा बढ़ाते हुए अंतागढ़ में भी चक्काजाम किया जा सकता है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि पिछले पांच दिनों के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार चर्चा की, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि क्षेत्र की समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं। इसी कारण अब आंदोलन को और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है।
धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि कोयलीबेड़ा से शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मांगों तक सीमित नहीं रहेगा। आंदोलनकारी अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग का भी समर्थन करेंगे और यदि आवश्यक हुआ तो आंदोलन को अंतागढ़ तक ले जाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि अंतागढ़ को जिला बनाए जाने से प्रशासनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी और कोयलीबेड़ा सहित पूरे क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इसी वजह से अब क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक सशक्तिकरण के मुद्दों को भी आंदोलन से जोड़ा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार जब तक उनकी दस सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। आंदोलन के केंद्र में ब्लॉक मुख्यालय से संबंधित सभी कार्यालयों का संचालन कोयलीबेड़ा से किए जाने की मांग बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यालय का दर्जा होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण कार्यालय अन्य स्थानों से संचालित हो रहे हैं, जिससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय को कोयलीबेड़ा क्षेत्र में ही संचालित करने, जिला सहकारी बैंक खोलने, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, महिला डॉक्टर की नियुक्ति, रिक्त पदों की पूर्ति, नए भवन और सोलर सिस्टम की स्वीकृति, खाद-बीज की समस्या के समाधान, जर्जर स्कूल एवं आश्रम भवनों की मरम्मत, इसी शैक्षणिक सत्र से कॉलेज प्रारंभ करने, डीएमएफ राशि का प्रभावित क्षेत्रों में शत-प्रतिशत उपयोग, कोयलीबेड़ा से अंतागढ़ मार्ग के डामरीकरण तथा राजस्व प्रकरणों के सरलीकरण के लिए कोयलीबेड़ा तहसील को अंतागढ़ अनुभाग से जोड़ने की मांग प्रमुख रूप से शामिल हैं।
आंदोलनकारियों ने दावा किया कि क्षेत्र के 68 गांवों के ग्रामीण और 18 पंचायतों के जनप्रतिनिधि इस आंदोलन के समर्थन में हैं। पांचवें दिन भी बड़ी संख्या में लोग धरना स्थल पर मौजूद रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराते रहे। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि अब वे केवल अधिकारियों के आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे और कलेक्टर, सांसद तथा विधायक स्तर पर हस्तक्षेप चाहते हैं।
लगातार पांच दिनों से जारी आंदोलन के कारण क्षेत्र में सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन फिलहाल किसी बड़े समाधान के संकेत नहीं मिले हैं। दूसरी ओर आंदोलनकारी अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को अंतागढ़ तक विस्तारित कर चक्काजाम और व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा।
कोयलीबेड़ा से शुरू हुआ यह आंदोलन अब क्षेत्रीय विकास, प्रशासनिक सुविधाओं और अंतागढ़ को जिला बनाने की मांग के समर्थन के साथ एक बड़े जनआंदोलन का स्वरूप लेता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
बस्तर संभाग हेड
अर्जुन देवांगन
9424287527
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