Wed 28 Oct 2026

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सह संपादक अर्जुन देवांगन : खदानें खुलीं, सड़कें बिगड़ीं, व्यापार प्रभावित—आखिर नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर जिले वासियों को मिला क्या?

*खदानें खुलीं, सड़कें बिगड़ीं, व्यापार प्रभावित—आखिर नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर जिले वासियों को मिला क्या?

*शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बड़ा सवाल; रावघाट-आमदई खदान, बदहाल सड़कें, DMF फंड और यात्री रेल सुविधा को लेकर उठे सवाल

नारायणपुर। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित होने के साथ अबूझमाड़ सहित नारायणपुर जिले के विकास के लगातार दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हालात को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि खदानों के खुलने और वर्षों से चल रहे सड़क निर्माण के बीच नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर जिले की आम जनता को वास्तविक रूप से क्या मिला?

अंतागढ़ से नारायणपुर, नारायणपुर से छोटेडोंगर-ओरछा और नारायणपुर-कोंडागांव सड़क मार्ग की बदहाल स्थिति पिछले कई वर्षों से आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। रावघाट और आमदई क्षेत्र में खनन गतिविधियां बढ़ने के बाद भारी वाहनों का दबाव भी सड़कों पर बढ़ा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का आरोप है कि इससे सड़कें और अधिक प्रभावित हुई हैं तथा सामान्य आवागमन कठिन हो गया है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण नारायणपुर-अंतागढ़, नारायणपुर-ओरछा और नारायणपुर-कोंडागांव मार्गों का निर्माण प्राथमिकता और तेज गति से क्यों नहीं कराया जा रहा? दूसरी ओर मुंबई से संपर्क बढ़ाने वाले कुतुल मार्ग पर तेजी से काम किए जाने को लेकर भी स्थानीय स्तर पर प्राथमिकताओं पर सवाल उठ रहे हैं।

निर्माण कार्य की धीमी गति और खराब सड़कों का सीधा असर स्थानीय व्यापार पर पड़ने का दावा किया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि दूसरे जिलों से लोगों का नारायणपुर आना-जाना कम हुआ है। खराब सड़क और यात्री बसों की कमी का सबसे अधिक नुकसान उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को उठाना पड़ रहा है जिनके पास निजी दोपहिया या चारपहिया वाहन नहीं हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि पूर्व में सड़क निर्माण को लेकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने वाले जनप्रतिनिधियों द्वारा सत्ता में आने के बाद सड़कें जल्द बनवाने के जो वादे किए गए थे, वे अब तक कितने पूरे हुए? क्षेत्र में चर्चा है कि ओरछा मार्ग पर लगभग 25 प्रतिशत, नारायणपुर-कोंडागांव मार्ग पर करीब 50 प्रतिशत और अंतागढ़-नारायणपुर मार्ग पर लगभग 30 से 35 प्रतिशत निर्माण ही पूरा हुआ है। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग से अपेक्षित है।

रावघाट और आमदई खदान से जिले को क्या मिला?

रावघाट और आमदई खदानों को लेकर भी स्थानीय जनता के बीच कई सवाल हैं। खनन से मिलने वाले जिला खनिज संस्थान न्यास यानी DMF फंड से जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में कितना काम हुआ, इसकी स्पष्ट जानकारी आम जनता के सामने आने की मांग उठ रही है।

सवाल है कि खदानों के आसपास और जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बड़े अस्पताल तथा स्थानीय मूल निवासियों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संस्थानों के रूप में क्या ठोस सुविधाएं विकसित हुईं?

रेलवे पहुंची, लेकिन यात्री ट्रेन का इंतजार क्यों?

रावघाट खदान के विकास के साथ रेलवे लाइन का विस्तार हुआ और रेलवे रावघाट तक पहुंची। इससे जिले के लोगों में उम्मीद जगी कि उन्हें भी जल्द रेल यात्रा की सुविधा मिलेगी। लेकिन वर्तमान में स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब खदान से लौह अयस्क परिवहन के लिए रेलवे का उपयोग किया जा रहा है, तो आम यात्रियों के लिए नियमित यात्री रेल सेवा कब शुरू होगी?

यदि रेलवे का बुनियादी ढांचा क्षेत्र तक पहुंच चुका है तो उसका लाभ स्थानीय नागरिकों को भी मिलना चाहिए—यह मांग अब और तेज होती दिखाई दे रही है।

खराब सड़क ने सामाजिक जीवन को भी किया प्रभावित

खराब सड़क का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। लोगों का कहना है कि परिवारों और रिश्तेदारों से मिलना-जुलना, सुख-दुख में शामिल होना, तीज-त्योहार, राखी-दिवाली तथा पर्यटन तक प्रभावित हुआ है। कई मार्गों पर यात्री बसों का संचालन कम होने से बिना निजी वाहन वाले लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है।

ऐसे में शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने बड़ा सवाल है—खदानों और कथित विकास परियोजनाओं की कीमत यदि स्थानीय जनता को खराब सड़क, प्रभावित व्यापार और कठिन आवागमन के रूप में चुकानी पड़ रही है, तो इसे विकास कैसे माना जाए?

जनता अब दावों और वादों से आगे जमीनी परिणाम देखना चाहती है। सड़क निर्माण की गति बढ़ाने, निर्माणाधीन मार्गों को आवागमन योग्य बनाए रखने, DMF फंड के उपयोग की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने और रावघाट तक यात्री रेल सेवा शुरू करने की दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—खदानों से संसाधन बाहर जा रहे हैं, लेकिन उसके बदले नारायणपुर और आसपास के जिलों की जनता के हिस्से में आखिर क्या आ रहा है?

सह संपादक अर्जुन देवांगन

9424287527

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