युधिष्ठिर देवांगन : धर्मनगरी में मानवता हुआ शर्मशार बेसुध महिला डेढ़ माह से बच्चे को गर्भ में लेकर घूमती रही ।
Ten Singh Thakur
Sat, Aug 8, 2026
धर्मनगरी में मानवता हुआ शर्मशार बेसुध महिला डेढ़ माह से बच्चे को गर्भ में लेकर घूमती रही इधर उधर, बेआश्रय को नहीं मिला आश्रय स्थल नहीं लगी भनक नगर पालिका और न ही पेट्रोलिंग को,आखिर जिम्मेदार कौन ।
भारत रत ही ऐसा देश है जहा गर्भस्त शिशु से लेकर मरणोपरांत तक मनुष्य को सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम लाभ पहुंचाती है, शासन प्रशासन की यह पहली जिम्मेदारी है कि शहर में बाहर से आने वाले सभी प्रकार के लोगों पर निगरानी रखनी है जिससे शहर में किसी प्रकार से कोई भी अनहोनी न हो लेकिन डोंगरगढ़ नगरीय प्रशासन की अपनी जिम्मेदारी को लेकर उदासीनता स्पष्ट दिखाई पड़ रही है जबकि नगर में पालिका द्वारा संचालित आश्रय स्थल का भी संचालन किया जाता है बावजूद इसके एक मां को खुले बच्चे को जन्म देने के लिए विवश होना पड़ रहा हैं... *आइए जानते है क्या है इस रिपोर्ट में...* कल शाम धर्मनगरी डोंगरगढ़ में जहां एक ओर ऊपर वाले का करिश्मा देखने मिला तो वहीं दूसरी ओर नगर पालिका एवं पुलिस की लापरवाही भी देखने मिली। आश्रय स्थल होते हुए भी एक विक्षिप्त महिला जो स्वयं को गोंदिया निवासी बता रही है लगभग डेढ़ माह से डोंगरगढ़ में गर्भ लिए घूम रही थी लेकिन ना तो पुलिस ने उसकी इस हालत को देखा ना नगर पालिका के कर्मचारियों ने इसलिए वह महिला दर _दर सड़को पर यहां वहां घूमती रही और आखिरकार आज शाम कालकापारा में लावारिस हालत में एक बच्चे को जन्म दिया और उसके बाद बच्चे को लेकर घूमती रही जिसकी सूचना किसी तरह पुलिस तक पहुंची तब जाकर उसे पकड़कर 108 एंबुलेंस में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां पर डाक्टरों ने जच्चा बच्चा दोनों की देखभाल शुरू की, डॉक्टर जयकिशन महोबिया ने बताया कि 108 के माध्यम से उक्त महिला को शाम 7 बजे लाया गया था बच्चे और मां की नाल जुड़ी हुई थी और दौड़ भाग नुकसान हो सकता था जिसे यहां पर काटा गया और जरूरी प्राथमिक उपचार दिया गया है। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ है, महिला स्वमं को गोंदिया कचरी मोहल्ला की निवासी बता रही है। युधिष्ठिर देवांगन
प्रांतीय प्रमुख्य
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