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सह संपादक अर्जुन देवांगन : छ.ग. सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने बस्तर संभाग के विधायकों सांसदों को सौंपा ज्ञापन, शीतकालीन सत्र में मांगें उठाने की अपील

छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने बस्तर संभाग के विधायकों और सांसदों को सौंपा ज्ञापन, शीतकालीन सत्र में मांगें उठाने की अपील

27% आरक्षण, जातिगत जनगणना और संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग; 31 अक्टूबर को सुकमा में आंदोलन की तैयारी

भानुप्रतापपुर, 18 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बस्तर संभाग में जनप्रतिनिधियों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में 18 अक्टूबर को संभाग के सभी विधायकों और सांसदों को ज्ञापन सौंपकर आगामी विधानसभा एवं लोकसभा के शीतकालीन सत्र में पिछड़ा वर्ग समाज की मांगों को प्रमुखता से उठाने का आग्रह किया गया।

इस अभियान के तहत भानुप्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक सावित्री मंडावी के उपस्थित नहीं हो पाने के कारण उनके प्रतिनिधि एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष सुनाराम तेता को ज्ञापन सौंपा गया। समाज के प्रतिनिधियों ने उनसे आग्रह किया कि पिछड़ा वर्ग समाज की मांगों को आगामी सत्र में सदन के पटल पर मजबूती से रखा जाए, ताकि समाज को उसके अधिकार दिलाने की दिशा में आवश्यक पहल हो सके।

चरणबद्ध आंदोलन के जरिए मांगों को लेकर लामबंद समाज

छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज अपनी मांगों को लेकर लगातार चरणबद्ध आंदोलन कर रहा है। समाज की ओर से 19 अगस्त को कांकेर जिला मुख्यालय में बड़ा आंदोलन किया गया था। इसके बाद कोंडागांव जिला मुख्यालय में भी विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगें रखी गईं।

आंदोलन की अगली कड़ी में 31 अक्टूबर को सुकमा जिला मुख्यालय में बड़ा आंदोलन प्रस्तावित है। इस दौरान राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर समाज की मांगों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।

समाज की प्रमुख मांगें

1. ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण: समाज ने केंद्र और अन्य राज्यों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने तथा आरक्षण व्यवस्था को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की है।

2. जातिगत जनगणना: राष्ट्रीय जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की तरह पिछड़ा वर्ग के लिए भी अलग कॉलम निर्धारित कर जातिगत जनगणना कराने की मांग उठाई गई है।

3. मूलनिवासी समाज को अधिकार और सुविधाएं: समाज ने पांचवीं अनुसूची के तहत मूलनिवासी समुदायों को लाभ एवं सुविधाएं देने की मांग की है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछड़ा वर्ग की संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखते हुए उनके अधिकारों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

52 प्रतिशत से अधिक आबादी का हवाला

समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग की आबादी 52 प्रतिशत से अधिक है, इसके बावजूद समाज को अपेक्षित अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर समाज में असंतोष और चिंता व्यक्त की जा रही है।

छत्तीसगढ़ सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने जनप्रतिनिधियों से मांगों को गंभीरता से लेते हुए आगामी शीतकालीन सत्र में इन्हें प्रमुखता से उठाने की अपील की है। अब इन मांगों पर संबंधित जनप्रतिनिधियों और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर समाज की नजर रहेगी।

सह संपादक:

अर्जुन देवांगन

मोबाइल: 9424287527

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