सह संपादक अर्जुन देवांगन : बड़ा सवाल—खदानों से लोहा बाहर जा रहा, लेकिन जिले की जनता को आखिर मिला क्या?
Ten Singh Thakur
Tue, Oct 6, 2026
बड़ा सवाल—खदानों से लोहा बाहर जा रहा, लेकिन जिले की जनता को आखिर मिला क्या?
नारायणपुर-अंतागढ़, ओरछा और कोंडागांव की बदहाल सड़कों पर उठे सवाल; व्यापार, यात्री परिवहन, DMF फंड और रावघाट यात्री रेल सेवा पर जवाब मांग रही जनता
नारायणपुर। अबूझमाड़ के विकास और क्षेत्र में बदलाव के दावों के बीच नारायणपुर से एक बड़ा सवाल शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सत्ताधारियों के सामने खड़ा है—रावघाट और आमदई जैसी खदानें खुलने के बाद नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव जिले की आम जनता को वास्तव में मिला क्या?
नारायणपुर-अंतागढ़, नारायणपुर-छोटेडोंगर-ओरछा और नारायणपुर-कोंडागांव जैसे महत्वपूर्ण सड़क मार्ग वर्षों से बदहाली और धीमे निर्माण की मार झेल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन गतिविधियों और भारी वाहनों के बढ़ते दबाव के बीच सड़कों की स्थिति ने आम यात्रियों के साथ स्थानीय व्यापार को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
सवाल निर्माण की प्राथमिकता पर भी है। जब जिले की बड़ी आबादी रोज इन्हीं प्रमुख मार्गों से आवागमन करती है तो इन सड़कों का निर्माण युद्धस्तर पर पूरा क्यों नहीं किया जा रहा? निर्माण अवधि में कम से कम ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही कि आम यात्री सुरक्षित और सुगमता से सफर कर सके?
स्थानीय स्तर पर ओरछा, कोंडागांव और अंतागढ़ मार्ग के निर्माण की धीमी प्रगति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इन मार्गों की वास्तविक प्रगति का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक किए जाने की भी आवश्यकता है।
सत्ता बदली, लेकिन सड़क की तस्वीर कब बदलेगी?
जो जनप्रतिनिधि विपक्ष में रहते हुए खराब सड़कों को लेकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करते थे, उनसे आज जनता उनके पुराने वादों का हिसाब मांग रही है। सत्ता में आने के बाद भी यदि वर्षों तक सड़कें अधूरी रहें और जनता उसी परेशानी से जूझती रहे तो जवाबदेही किसकी होगी?
खदानों का लाभ किसे? DMF का हिसाब जनता के सामने आए
रावघाट और आमदई खदानों से जिले को मिलने वाले DMF फंड को लेकर भी जनता के बीच सवाल हैं। खनन प्रभावित क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं में कितना प्रत्यक्ष लाभ मिला, इसकी विस्तृत और पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
जनता जानना चाहती है कि खदान खुलने के बाद क्षेत्र में ऐसा कौन-सा बड़ा अस्पताल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थान या बुनियादी सुविधा विकसित हुई जिसका सीधा लाभ स्थानीय मूल निवासियों को मिल रहा है?
लोहा ले जाने के लिए रेल पहुंच गई, यात्री ट्रेन कब पहुंचेगी?
रावघाट तक रेलवे पहुंचने से लोगों को उम्मीद थी कि क्षेत्र को यात्री रेल सुविधा मिलेगी। अब जब खनिज परिवहन के लिए रेलवे का उपयोग हो रहा है तो स्थानीय जनता का सवाल स्वाभाविक है—यदि रावघाट से लोहा रेल से बाहर जा सकता है तो नारायणपुर क्षेत्र की जनता यात्री ट्रेन में कब बैठेगी?
रेलवे केवल खदान के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के लिए भी विकास का माध्यम बने—इस दिशा में ठोस पहल की जरूरत है।
सड़क खराब तो व्यापार से लेकर रिश्तेदारी तक प्रभावित
बदहाल सड़कों का असर केवल वाहनों पर नहीं पड़ता। स्थानीय व्यापार, बस सेवा, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन सभी इससे जुड़े हैं। लोगों का कहना है कि खराब सड़क के कारण दूसरे जिलों से आवागमन कम हुआ है। सबसे ज्यादा परेशानी उस गरीब और सामान्य परिवार को होती है जिसके पास निजी वाहन नहीं है और जो यात्री बस पर निर्भर है।
राखी हो या दीपावली, शादी हो या किसी परिवार का सुख-दुख—जब सड़क और यात्री परिवहन ही भरोसेमंद न रहे तो इसका असर सीधे सामाजिक जीवन पर पड़ता है।
अब जनता को घोषणा नहीं, जमीन पर विकास चाहिए
सरकार यदि अबूझमाड़ और नारायणपुर के विकास का दावा करती है तो उसकी पहली पहचान अच्छी सड़क, बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुगम यातायात और स्थानीय लोगों को खनिज संसाधनों का वास्तविक लाभ मिलना होना चाहिए।
सवाल सीधा है—खनिज संपदा हमारी धरती से निकले, भारी वाहन हमारी सड़कों पर चलें, लोहा रेल से बाहर जाए और स्थानीय जनता के हिस्से में टूटी सड़क, प्रभावित व्यापार और मुश्किल सफर आए, तो आखिर इसे विकास कैसे माना जाए?
नारायणपुर सहित आसपास के जिलों की जनता अब शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से दावों का नहीं, जमीनी विकास का हिसाब चाहती है।
सह संपादक
अर्जुन देवांगन
9424287527
Cgfastnews24cgmp
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