Wed 28 Oct 2026

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सुरक्षा कैंप से शिक्षा का सफर । : 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का ठिकाना रहा भाटपाल कैंप बना छात्रावास और शिक्षा का नया केंद्र

सुरक्षा कैंप से शिक्षा का सफर

15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का ठिकाना रहा भाटपाल कैंप अब दूरस्थ आदिवासी विद्यार्थियों के लिए बना छात्रावास और शिक्षा का नया केंद्र।नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलती तस्वीर: पुराने सुरक्षा परिसर को शिक्षा, आवास और बच्चों के भविष्य निर्माण से जोड़ा । पहली बार पूर्व सुरक्षा कैंप को विद्यार्थियों के लिए छात्रावास एवं शिक्षा की सुविधाओं से जोड़ते हुए विकास की नई दिशा दी गई है। भाटपाल में लगभग 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का कैंप रहे परिसर को अब जनजातीय विद्यार्थियों के छात्रावास के रूप में विकसित किया गया है। कभी जिस परिसर का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करना था, आज वही परिसर दूरस्थ आदिवासी बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य निर्माण का आधार बन रहा है।यह बदलाव केवल किसी भवन के उपयोग में परिवर्तन नहीं है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलती विकास प्राथमिकताओं का प्रतीक है। जहां लंबे समय तक सुरक्षा और पहुंच सबसे बड़ी चुनौती रही*, वहीं अब उसी क्षेत्र में शिक्षा, आवास, बुनियादी सुविधाओं को विकास की नई धुरी बनाया जा रहा है।

सुरक्षा से शिक्षा की ओर बदलता भाटपाल

जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित भाटपाल में सुरक्षा बलों का कैंप लंबे समय तक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। करीब 15 वर्षों तक यहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी रही।क्षेत्र में बदली परिस्थितियों के बाद जिला प्रशासन ने इस अधोसंरचना को केवल खाली छोड़ने के बजाय जनहित में उपयोग करने की पहल की। कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने सुझाव दिया कि भाटपाल के पूर्व सुरक्षा कैंप को ऐसे विद्यार्थियों के लिए छात्रावास में परिवर्तित किया जाए, जो दूरस्थ गांवों से स्कूल आते हैं और जिन्हें आवास की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण पढ़ाई जारी रखने में कठिनाई होती है।इस पहल का उद्देश्य केवल भवन का पुनर्पयोग नहीं था, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के लिए शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाना था। 11 अगस्त 2026 से यहां विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था प्रारंभ हुई।

एक परिसर में प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास।भाटपाल के इस परिसर में वर्तमान में दो अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास संचालित हो रहे हैं।प्री-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 6वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं और वर्तमान में 114 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले इन विद्यार्थियों को विद्यालय के समीप सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है।वहीं पोस्ट-मैट्रिक अनुसूचित जनजाति बालक छात्रावास में कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 50 सीटें स्वीकृत हैं और वर्तमान में 39 विद्यार्थी रह रहे हैं। यह छात्रावास एजुकेशन सिटी कुतुल से संबद्ध विद्यार्थियों की आवासीय आवश्यकता को पूरा कर रहा है।पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की शुरुआत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। दूरस्थ क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थियों के लिए कक्षा 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण था। विद्यालय के पास रहने के लिए उन्हें निजी तौर पर आवास की व्यवस्था करनी पड़ती थी, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। अब छात्रावास की सुविधा मिलने से इन विद्यार्थियों को सुरक्षित आवास और पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल रहा है।दूरस्थ गांवों के बच्चों के लिए शिक्षा का नया आधार।इन क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय के समीप छात्रावास की सुविधा उनकी शिक्षा को निरंतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। दूरी और आवागमन की चुनौती कम होने से विद्यार्थी नियमित रूप से अपनी पढ़ाई जारी रख पा रहे हैं।शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल छात्रावास से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है। इससे विद्यार्थियों को विद्यालय तक पहुंचने में कम समय लगता है और वे अपनी पढ़ाई पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं।नए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस।नारायणपुर और अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में प्रशासन की प्राथमिकता अब केवल स्कूल भवनों तक पहुंच बनाने तक सीमित नहीं है। बच्चों को स्कूल तक लाना, उन्हें नियमित रूप से स्कूल में बनाए रखना और उच्च कक्षाओं तक उनकी शिक्षा जारी रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।भाटपाल में छात्रावास की व्यवस्था इसी सोच का हिस्सा है।प्री-मैट्रिक स्तर पर बच्चों को आवास उपलब्ध होने से वे नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं, वहीं पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की शुरुआत से कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखने का रास्ता आसान हुआ है।इस तरह प्री-मैट्रिक से पोस्ट-मैट्रिक स्तर तक आवासीय सुविधा उपलब्ध कराकर विद्यार्थियों की शिक्षा को निरंतरता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

*बच्चों की जुबानी बदलाव की कहानी।*कक्षा 9वीं के विद्यार्थी रितेश सोनी, जो हलामीमुंजमेटा से आते हैं, बताते हैं कि नए परिसर में आने के बाद विद्यार्थी काफी खुश हैं। उनके लिए सुरक्षित परिसर में रहकर विद्यालय जाना और साथियों के साथ पढ़ाई करना पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक है।वहीं राजबेड़ा निवासी कक्षा 12वीं के विद्यार्थी कोमेंद्र, जो करीब 22 किलोमीटर दूर से आते हैं, के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास का खुलना विशेष राहत लेकर आया। इससे पहले उन्हें विद्यालय के पास रहने के लिए बाहर रहना पड़ता था और आवास पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था। छात्रावास शुरू होने के बाद अब उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिल गया है।

*कलेक्टर ने किया औचक निरीक्षण*कलेक्टर नम्रता जैन ने भाटपाल पहुंचकर छात्रावास का औचक निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने छात्रावास के विभिन्न कक्षों का निरीक्षण करते हुए विद्यार्थियों के रहने, भोजन, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली।कलेक्टर ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए उनकी आवश्यकताओं और समस्याओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने अपनी विभिन्न मांगों और आवश्यकताओं से उन्हें अवगत कराया।नम्रता जैन ने बच्चों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए उनकी जायज मांगों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को छात्रावास परिसर एवं अपने कमरों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया और कहा कि स्वच्छ, सुरक्षित एवं व्यवस्थित वातावरण में रहकर वे अपनी पढ़ाई पर बेहतर ढंग से ध्यान केंद्रित करें।भोजन की गुणवत्ता और दैनिक व्यवस्थाओं की भी समीक्षा।कलेक्टर ने छात्रावास के किचन का निरीक्षण करते हुए विद्यार्थियों के लिए तैयार किए जा रहे चावल एवं सब्जी का भी अवलोकन किया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता तथा निर्धारित मीनू के अनुसार नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराने के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए।*अबूझमाड़ में बदलते विकास की तस्वीर*

भाटपाल में हुआ यह परिवर्तन अबूझमाड़ और नारायणपुर में बदलती विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इलाकों में आज प्रशासन का फोकस केवल सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक विकास के माध्यम से लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।भाटपाल का पूर्व सुरक्षा कैंप इसी बदलाव की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करता है। एक ऐसा परिसर जो कभी क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था, आज उसी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा के लिए सुरक्षित वातावरण दे रहा है।जहां कभी सुरक्षा बलों की मौजूदगी इस परिसर की पहचान थी, वहीं आज स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे यहां अपने भविष्य की तैयारी कर रहे हैं।भाटपाल की यह कहानी बताती है कि अबूझमाड़ और नारायणपुर में बदलाव केवल अधोसंरचना के निर्माण का नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए अवसरों के निर्माण का बदलाव है।सुरक्षा से शिक्षा की ओर बढ़ता यह कदम उस नए नारायणपुर की तस्वीर है, जहां दूरस्थ गांवों के बच्चे अब दूरी और परिस्थितियों की सीमाओं से आगे बढ़कर पढ़ाई, अवसर और बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

प्रधान संपादक

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