: बस्तर ओलंपिक का शानदार समापन
Sun, Nov 24, 2024
तेन सिंह ठाकुर की रिपोर्ट नारायणपुर
बस्तर ओलंपिक 2024 समापन समारोह में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा* पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी जीवन के लिए महत्वपूर्ण है - श्री शर्मा श्री विजय शर्मा ने खिलाड़ियों के साथ ली तस्वीर बस्तर ओलंपिक के जिला स्तरीय के विजेता खिलाड़ियों को किया गया पुरस्कार वितरण बस्तर को उन्नतशील प्रगतिशील विकसित और शांत प्रदेश बनाने में सहभागिता बने- विजय शर्मा जिला स्तरीय बस्तर ओलंपिक के समापन कार्यक्रम में खिलाड़ियों से मिलकर अबूझमाड़ क्षेत्र के स्थितियों के बारे में जानकारी ली नारायणपुर और ओरछा में खेल मैदान बनाने हेतु 50-50 लाख रुपए की घोषणा 31 मार्च 2026 तक बस्तर को माओवादियों से मुक्त किया जाएगा नारायणपुर, 24 नवंबर 2024// जनजातीय बाहुल्य और माओवाद प्रभावित बस्तर संभाग में खेल के माध्यम से विकास और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा बस्तर ओलंपिक 2024 का आयोजन किया गया है। इस आयोजन को लेकर युवाओं में विशेष उत्साह देखा गया, जिसमें सुदूर गांवों से आए युवा अपने खेल कौशल का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल को जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक खेलों के संरक्षण के साथ ही युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया है।नारायणपुर जिले में जिला स्तरीय बस्तर ओलंपिक प्रतियोगिता का आयोजन 22 से 23 नवंबर तक किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन नारायणपुर के परेड ग्राउंड और खेल परिसर में किया गया, जिसमें जिले के खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आज जिला स्तरीय बस्तर ओलंपिक के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के गृह एवं जेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला स्तरीय ओलंपिक में जीतने वाले खिलाड़ियों को 5 से 10 दिसंबर तक जगदलपुर में आयोजित होने वाले संभाग स्तरीय बस्तर ओलंपिक में जीतने के लिए उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्री श्री अमित साह द्वारा 5 अगस्त 2019 को जम्मू एवं कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का निर्णय लिया गया, जिसके समाप्त होने से देश में एक ही संविधान लागू हो गया है। बस्तर को विकसीत करने के लिए अंदरुनी गांव तक सड़़क, पुल पुलिया, आंगनबाड़ी, स्कूल, पेयजल, बिजली, मोबाईल टावर लगाए जाएंगे। बस्तर की तस्वीर को बदलने का कार्य मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में कार्य किया जा रहा है। बस्तर को माओवादी मुक्त बनाने में आप सभी की अहम भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि माओवादियों ने बस्तर की जनता को विकास से अलग रखने का मनसूबा बना लिया है, जिसके कारण अब तक अंदरूनी गांवो तक स्कूल, सड़क, पुल पुलिया और पेयजल नहीं पहुंच पाई है और बस्तर के बच्चों को अशिक्षित बना रहें हैं। उनके मनसूबों को सफल होंने नहीं देंगे 31 मार्च 2026 तक बस्तर संभाग को माओवादी मुक्त बनाने का संकल्प हम सब को लेना पड़ेगा। गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवादियों को डटकर सामना करने के लिए हमें आगे आना होगा। बस्तर को शांत प्रदेश, प्रगतिशील, उन्नतीशील और विकसित बनाने में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति और परंपरा को बचाए रखने के लिए हम सबको आगे आने की आवश्यकता है। बस्तर के खिलाड़ियों में एक अद्भुत प्रतिभाएं हैं, जिसको निखारने के लिए यह बस्तर ओलंपिक के माध्यम से अच्छा अवसर मिला है, जिसे आप लोग अच्छे से प्रदर्शन कर खेल को आगे बढ़ाएं। बस्तर में प्रचुर मात्रा में जल जंगल जमीन है उसको संरक्षित कर अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए योगदान दें। अबूझमाड़ के पहुंचविहीन क्षेत्र में सड़क, पुल पुलिया, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी, उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किया जा रहा हैं, शीघ्र ही अबुझमाड़ मुख्य धारा से जुड़ने लगेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने ओरछा और नारायणपुर में 50-50 लाख रूपये से निर्मित खेल मैदान बनाने की घोषणा की।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के द्वारा बस्तर ओलंपिक 2024 के जिला स्तरीय के विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार वितरण किया। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ जीवन में खेल भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए खेल में लक्ष्य निर्धारित कर अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए परिश्रम करना आवश्यक है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप गांव के प्रतिभाओं को निखारने का अच्छा समय मिला है इस अवसर का फायदा उठाते हुए राज्य स्तर तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित कर खेल के क्षेत्र में आगे बढ़े। खिलाड़ियों को हमेशा खेल भावना के साथ खेलकर अपने अनुशासन का परिचय देना चाहिए। उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि अबूझमाड़ क्षेत्र के बच्चों ने मलखम्भ खेलों का हुंनरबाज बनकर देश के कई शहरों में प्रदर्शन कर अपने अबूझमाड़ का नाम रोशन किया है। आयोजन में सहभागिता प्रदान करने वाले खिलाड़ियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्तकर्ता खिलाड़ी को पुरस्कार स्वरूप मोमेंटों, ट्राफी, प्रमाण पत्र और गणवेश भी प्रदाय किया गया। आयोजन में भाग लेने वाले समस्त प्रतिभागियों को समहभागित प्रमाण पत्र प्रदाय किया गया।कलेक्टर श्री बिपिन मांझी ने अपने उदबोधन में कहा कि बस्तर संभाग में खेल के माध्यम से विकास और संस्कृति को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में बस्तर ओलंपिक 2024 का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन ने क्षेत्र के युवाओं में विशेष जोश और उत्साह भर दिया है। मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रतिभावान युवा अपनी खेल प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी ने इस पहल को न केवल जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक खेलों के संरक्षण के लिए अहम बताया है, बल्कि इसे युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास भी माना है। इस प्रकार यह आयोजन विकास और संस्कृति के समावेशी उत्थान का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस आयोजन में विभिन्न खेल विधाओं जैसे एथलेटिक्स, बैडमिंटन, कराटे, तीरंदाजी, खो-खो, कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबॉल और रस्साकसी की प्रतिस्पर्धाएँ शामिल हैं। जिले के युवाओं ने इन खेलों में अपनी सक्रिय और उत्कृष्ट भागीदारी दर्ज कर आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बस्तर ओलंपिक 2024 क्षेत्र के युवाओं की ऊर्जा और सामर्थ्य को निखारने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को एक नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रहा है।कार्यक्रम को रामकृष्ण मिशन आश्रम के सचिव स्वामी व्यापतानंद और सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक श्री रूपसाय सलाम ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य प्रताप मंडावी, नगर पालिका परिषद के पार्षद श्री जैकी कश्यप, पंडीराम मंडावी, नारायण मरकाम, गौतम गोलछा, नरेंद्र मेश्राम, संदीप झा, पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी वासु जैन, संयुक्त कलेक्टर अभिषेक गुप्ता, एसडीएम अभयजीत मंडावी, खेल अधिकारी डॉ. सुमित गर्ग सहित शिक्षक शिक्षिकाएं, जनप्रतिनिधि, पत्रकारगण एवं छात्र छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थेसभी जिलों के लिए ब्यूरो चीफ की नियुक्ति करनी है सम्पर्क करेंप्रधान संपादकतेन सिंह ठाकुर94242875476264046084
: विश्व पर्यटन मानचित्र में बस्तर की घुड़मा रास ने बनाई अपनी विशिष्ट पहचान
Mon, Nov 18, 2024
*विश्व पर्यटन मानचित्र में बस्तर के धुड़मारास गांव ने बनाई अपनी जगह*
*संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए चयनित हुआ ग्राम धुड़मारास* *साहसिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध बस्तर के धुड़मारास गांव की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई स्थापित* *मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई* रायपुर, 16 नवंबर 2024/ छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के छोटे से गांव धुड़मारास ने देश और दुनिया में अपनी अनोखी पहचान बनाई है। बस्तर जिले के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के उन्नयन कार्यक्रम के लिए चयनित किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के पर्यटन ग्राम उन्नयन कार्यक्रम के लिए 60 देशों से चयनित 20 गांवों में भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के धुड़मारास ने भी अपनी जगह बनाई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए पर्यटन विभाग की टीम के साथ ही बस्तर जिला प्रशासन तथा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धुड़मारास की सफलता का मुख्य श्रेय यहां के स्थानीय निवासियों को जाता है, जिन्होंने अपने पारंपरिक ज्ञान और संसाधनों को संरक्षित रखते हुए इसे आकर्षक पर्यटक स्थल में बदल दिया है। धुड़मारास प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। बस्तर के अदभुत आदिवासी जीवनशैली, पारम्परिक व्यंजन, हरियाली और जैव विविधता से समृद्ध यह गांव पर्यटकों के लिए एक आकर्षक ही नहीं बल्कि रोमांचक स्थल है। धुड़मारास गांव दुनिया भर के उन 20 गांवों में से एक है जिसे सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव उन्नयन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चुना गया है। धुड़मारास को इसकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संुदरता और सतत पर्यटन विकास की क्षमता के कारण चुना गया है। उन्नयन कार्यक्रम में शामिल होने से गांव को उन संसाधनों तक पहंुंच प्राप्त होगी जो इसके पर्यटन बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, सांस्कृतिक संपत्तियों को बढ़ावा देने और ग्रामवासियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार में मदद करेंगे। विश्व स्तर पर पर्यटन गांव के रूप में इस गांव की पहचान स्थापित होने का तात्पर्य यह भी है कि लंबे समय के बाद बस्तर में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उल्लेखनीय है कि धुड़मारास तथा बस्तर के ही चित्रकोट गांव को इस वर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव का पुरस्कार मिला था। प्रकृति की गोद में बसा धुड़मारास गांव घने जंगलों से घिरा हुआ है। गांव के बीच से बहती कांगेर नदी इसे मनमोहक बना देती है। बस्तर के लोग मेहमाननवाजी के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए उपलब्ध करवा रहे हैं, ठहरने की सुविधा उपलब्ध करवाने से उन्हें रोजगार मिल रहा है। गांव के युवा पर्यटकों को आसपास के क्षेत्रों की सैर कराते हैं। स्थानीय खानपान के अंतर्गत पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक व्यंजन परोसे जाते हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर में पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए ट्रैकिंग ट्रेल और कैंपिंग साइट विकसित करने सहित होम-स्टे की सुलभता हेतु पहल कर रही है। साथ ही स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों को प्रोत्साहन दे रही है, जिससे ईलाके के रहवासी ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की उपलब्धता होने के साथ आय संवृद्धि हो सके। राज्य सरकार पर्यटकों को आकर्षित करने हेतु क्षेत्र में सड़कों और परिवहन सुविधाओं का विकास पर भी ध्यान दे रही है। बस्तर के पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में देश के पर्यटकों सहित अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए व्यापक प्रचार- प्रसार किया जा रहा है। वहीं स्थानीय हस्तशिल्प और कला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार के वन एवं पर्यटन विभाग ने धुड़मारास को ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब जिले के नागलसर और नेतानार में भी स्थानीय युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति द्वारा गांव में बहने वाली शबरी एवं कांगेर नदी में कयाकिंग एवं बम्बू राफ्टिंग की सुविधा पर्यटकों को मुहैया कराई जा रही है। साथ ही स्थानीय व्यंजन से पर्यटकों को बस्तर के पारम्परिक खान-पान का स्वाद मिल रहा है। गांव के युवाओं की ईको पर्यटन विकास समिति कांगेर नदी में कयाकिंग और बम्बू राफ्टिंग की सुविधाएं पर्यटकों को उपलब्ध करवाती है, जिससे इस समिति को अच्छी आमदनी हो रही है। यह पर्यटन समिति अब अपनी आय से गांव में पर्यटकों के लिए प्रतीक्षालय और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रहे हैं। बेस्ट टूरिज्म विलेज धुड़मारास की कहानी यह साबित करती है कि जब सामुदायिक भागीदारी और शासन का सहयोग मिलता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक और सांस्कृतिक विकास संभव है। यह गांव अब बस्तर के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन गया है। यही वजह है कि कांगेर घाटी नेशनल पार्क के नागलसर और नेतानार में भी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिल रहा है।प्रधान संपादकविज्ञापन और सामाचार के लिएसम्पर्क करेंतेन सिंह ठाकुर94242875476264046084तेन सिंह ठाकुर