: सफलता की कहानी,सहायक शिक्षक मण्डावी की नई तैनाती, ताड़ोबेड़ा में शिक्षा की रोशनी फैलाने को तैयार
Ten Singh Thakur
Fri, Jun 6, 2025
सफलता की कहानी,सहायक शिक्षक मण्डावी की नई तैनाती, ताड़ोबेड़ा में शिक्षा की रोशनी फैलाने को तैयार
नारायणपुर, 06 जून 2025// छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे ’युक्तियुक्तकरण’ (तर्कसंगत समायोजन) के प्रभाव अब ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं। जिले के 14 प्राथमिक विद्यालय जो लंबे समय से शिक्षक विहीन थे, उन्हें अब नए शिक्षक मिल गए हैं। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि सैकड़ों बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने वाला है। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षकों की नई पदस्थापनाएं की गईं हैं, जिसमें नारायणपुर जिले के कुल 132 शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया है, जिसके तहत् जिले के सहायक शिक्षक धनीराम मण्डावी को उनके स्वेच्छा से नई पदस्थापना ओरछा विकासखण्ड के शासकीय प्राथमिक शाला ताड़ोबेड़ा में की गई है। सहायक शिक्षक धनीराम मण्डावी पहले शासकीय प्राथमिक शाला बोगान में थे। ताड़ोबेड़ा में शिक्षा के नए सूरज का उदयओरछा विकासखण्ड के ताड़ोबेड़ा गांव में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई शुरुआत हुई है। सहायक शिक्षक धनीराम मण्डावी को उनके स्वेच्छा से शासकीय प्राथमिक शाला ताड़ोबेड़ा में पदस्थापित किया गया है। इससे पहले वे शासकीय प्राथमिक शाला बोगान में अपनी सेवाएं दे रहे थे।श्री मण्डावी ने स्वयं यह विद्यालय चुना है। उनका कहना है कि ताड़ोबेड़ा जैसे दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की अत्यंत आवश्यकता है। उनका उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों को अनुशासन, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराना भी है, ताकि वे एक सक्षम और संवेदनशील नागरिक बन सकें।धनीराम मण्डावी ने बताया कि उन्हें यह अवसर युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के तहत प्राप्त हुआ है, और वह इसे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं। वे मानते हैं कि शिक्षक का कर्तव्य केवल पाठ्यक्रम समाप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य को सँवारना होता है। वे कहते हैं कि यदि हम जैसे शिक्षक दूरस्थ गांवों में नहीं पहुंचेंगे तो वहां के बच्चे शिक्षा से वंचित रह सकते हैं, और यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है कि हम ऐसा न होने दें। उन्होंने इस सकारात्मक बदलाव के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार जताया और कहा कि यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से सराहनीय है, बल्कि यह एक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में प्रभावशाली कदम भी है।धनीराम मण्डावी का यह समर्पण और सोच निश्चित ही ताड़ोबेड़ा गांव के शैक्षिक परिदृश्य को बदलने में मील का पत्थर साबित होगा। उनकी यह पहल न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह बताती है कि जब शिक्षक अपने कर्तव्य को जुनून से निभाते हैं, तो समाज में परिवर्तन सुनिश्चित होता है
प्रधान संपादक
तेन सिंह ठाकुर
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